मोबाइल और खेल का संतुलन

मोबाइल और खेल का संतुलन

आज के समय में जब हर बच्चा, हर युवा किसी न किसी चीज़ में व्यस्त दिखता है, तब मैदानों की शांति यह बताने के लिए काफी है कि क्रिकेट या किसी भी खेल से दूरियाँ बढ़ चुकी हैं। पहले जहाँ सुबह होते ही बच्चे बल्ला और गेंद लेकर मैदान की ओर दौड़ पड़ते थे, वहीं आज मोबाइल और गैजेट्स ने उनकी पूरी दुनिया बदल दी है। यही कारण है कि Patna Cricket Academy जैसे संस्थान लगातार इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि युवाओं की रुचि अब मैदान से हटकर स्क्रीन की ओर क्यों जा रही है।

मोबाइल और खेल का संतुलन

Patna Cricket Academy में हर दिन कोच यह अनुभव करते हैं कि जिन बच्चों में कभी जुनून हुआ करता था, आज उनमें आलस्य और ध्यान भटकाव की समस्या बढ़ती जा रही है। बच्चे अब खेल के लिए नहीं बल्कि रील बनाने या देखने के लिए समय निकालते हैं। पहले जो गेंदबाज़ अपनी गति पर गर्व करते थे, आज वही बच्चे मोबाइल गेम्स में रन बनाकर संतोष पा रहे हैं। यही वह परिवर्तन है जिसने क्रिकेट की आत्मा को भीतर तक झकझोर दिया है।

Patna Cricket Academy का मानना है कि असली क्रिकेट सिर्फ बल्ले और गेंद का खेल नहीं है, यह एक अनुशासन है, एक आदत है जो इंसान को मेहनत, समय की कद्र और जीत का सही अर्थ सिखाती है। लेकिन जब यही समय मोबाइल की रोशनी में नष्ट हो रहा हो, तो उस मेहनत और अनुशासन का क्या अर्थ रह जाता है?

आज के युवा हर दिन औसतन पाँच से छह घंटे मोबाइल पर बिताते हैं। Patna Cricket Academy के प्रशिक्षक बताते हैं कि बच्चों की आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है, उनका ध्यान कम हो रहा है, और मैदान में उनका स्टैमिना पहले जैसा नहीं रहा। यह सब सिर्फ मोबाइल की वजह से है। वह मशीन जो मनोरंजन के लिए बनी थी, अब धीरे-धीरे युवाओं की ज़िंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बन गई है।

कभी गाँव-गाँव में छोटे-छोटे टूर्नामेंट हुआ करते थे, बच्चे बिना किसी डर के धूप में खेलते थे। लेकिन अब अभिभावक खुद बच्चों को फोन थमा देते हैं ताकि वे चुप रहें। Patna Cricket Academy के मुताबिक, यह सोच बच्चों को न केवल खेल से दूर कर रही है बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास को भी रोक रही है। क्रिकेट या कोई भी खेल सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग और आत्मा को भी मजबूत बनाता है।

Patna Cricket Academy के मुख्य कोचों का मानना है कि जब तक युवा खुद इस सच्चाई को नहीं समझेंगे कि मोबाइल सिर्फ समय नहीं बल्कि जीवन को भी खा रहा है, तब तक बदलाव असंभव है। उन्होंने कई बार बच्चों से कहा है — “अगर तुम सच में कुछ बनना चाहते हो, तो मैदान में उतरो, मोबाइल में नहीं।”

आज मोबाइल के आकर्षण ने युवाओं को वास्तविकता से दूर कर दिया है। उन्हें लगता है कि रीलों की दुनिया ही असली है, जबकि असली सम्मान और पहचान तो मैदान में मिलती है। Patna Cricket Academy यही सिखाती है — कि जो पसीना ज़मीन पर गिरता है, वही भविष्य की सफलता की गारंटी बनता है।

सरकार को चाहिए कि स्कूलों और अकादमियों के सहयोग से खेलों को अनिवार्य बनाया जाए। लेकिन सबसे पहले युवाओं को खुद यह निर्णय लेना होगा कि वे मोबाइल की कैद में रहेंगे या मैदान की आज़ादी में जिएँगे।

Patna Cricket Academy यह संदेश देना चाहती है कि हर बच्चा अपने भीतर एक खिलाड़ी लेकर पैदा होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उस खिलाड़ी को जगा देता है, और कोई उसे मोबाइल की स्क्रीन के नीचे दबा देता है।

अब समय है कि हर माता-पिता और हर छात्र समझे — मोबाइल मनोरंजन का साधन हो सकता है, लेकिन जीवन का उद्देश्य नहीं। मैदान ही वह जगह है जहाँ सपने साकार होते हैं, जहाँ आत्मविश्वास जन्म लेता है और जहाँ इंसान खुद से मिलता है।

Patna Cricket Academy का अंतिम संदेश यही है –
“मोबाइल से नहीं, मैदान से जुड़ो। क्योंकि जीत उन्हीं की होती है जो स्क्रीन नहीं, ज़मीन पर संघर्ष करते हैं।”

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