क्रिकेट में मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी
क्रिकेटर के शरीर की लचक और मोबिलिटी ही असली ताकत होती है क्यों हर खिलाड़ी को स्ट्रेचिंग और फ्लेक्सिबिलिटी पर ध्यान देना चाहिए Patna Cricket Academy का अनुभव

सुबह की हल्की ठंडी हवा में जब मैदान की मिट्टी से खुशबू उठती है, तो खिलाड़ी अपने दिन की शुरुआत करता है। बैट हाथ में लेकर जब वह नेट की तरफ बढ़ता है, तो उसके मन में सिर्फ एक ही बात होती है कि आज कुछ नया सीखना है। लेकिन बहुत कम खिलाड़ी जानते हैं कि असली सुधार सिर्फ बैटिंग या बॉलिंग में नहीं, बल्कि शरीर की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी में छिपा होता है।
Patna Cricket Academy के कोच हर दिन खिलाड़ियों को यह सिखाते हैं कि शरीर को खेलने से पहले तैयार करना कितना जरूरी होता है। कई बार बच्चे सीधे दौड़ना शुरू कर देते हैं या फिर वेट लिफ्टिंग के जरिए ताकत बढ़ाने की कोशिश करते हैं। लेकिन शरीर अगर लचीला नहीं है, तो वही ताकत एक दिन चोट में बदल जाती है। यही कारण है कि क्रिकेट में मोबिलिटी को ताकत से भी बड़ा माना गया है।
मोबिलिटी का मतलब सिर्फ मूवमेंट नहीं होता, बल्कि यह शरीर के जोड़ों की वह शक्ति है जो बिना किसी दर्द या रुकावट के काम कर सके। जब एक बल्लेबाज तेजी से रन लेने के लिए झुकता है, मुड़ता है, या जब एक फील्डर मैदान में डाइव लगाता है, तो यह सब उसी मोबिलिटी का परिणाम होता है। अगर शरीर सख्त हो जाए, तो प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ता है।
Patna Cricket Academy में सुबह के अभ्यास से पहले हर खिलाड़ी को स्ट्रेचिंग कराई जाती है। गर्दन से लेकर पैरों तक हर हिस्से को धीरे-धीरे खोला जाता है ताकि मांसपेशियों में खून का संचार बढ़े और शरीर खेलने के लिए तैयार हो जाए। खिलाड़ी जब नेक रोटेशन, शोल्डर मूवमेंट, क्रिकेट ट्रेनिंग टिप्स, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, हिप ओपनर एक्सरसाइज और लेग स्विंग्स करते हैं, तो उनका शरीर अपने पूरे दायरे में चलने लगता है।
एक दिन अकादमी के एक युवा खिलाड़ी ने कोच से पूछा कि सर, वेट लिफ्टिंग करने से ताकत बढ़ती है, तो स्ट्रेचिंग क्यों जरूरी है। कोच मुस्कराए और बोले, बेटा ताकत तब काम आएगी जब शरीर लचीला होगा। अगर तुम्हारे मसल्स सख्त हैं, तो तुम न झुक पाओगे न घूम पाओगे और चोट तुम्हारे पीछे लगेगी। लचक ही वह कला है जो तुम्हें मैदान में लंबा चलने देती है।

धीरे-धीरे उस खिलाड़ी ने रोजाना मोबिलिटी पर ध्यान देना शुरू किया। कुछ ही हफ्तों में उसकी स्पीड, बैलेंस और रिएक्शन टाइम में फर्क दिखाई देने लगा। अब वह न केवल तेज दौड़ता था बल्कि कैच पकड़ते समय या शॉट लगाते समय उसका शरीर बिल्कुल सहज और संतुलित रहता था।
Patna Cricket Academy हमेशा यही संदेश देती है कि क्रिकेट में जीतने के लिए सिर्फ ताकत नहीं बल्कि लचीलापन जरूरी है। हर खिलाड़ी को कम से कम पंद्रह मिनट अपने शरीर को तैयार करने में लगाने चाहिए ताकि खेल के दौरान न सिर्फ प्रदर्शन बेहतर हो बल्कि शरीर चोट से भी सुरक्षित रहे।
क्रिकेट फिटनेस सिर्फ हाथों और पैरों का खेल नहीं है, यह पूरे शरीर की समझ और नियंत्रण का खेल है। जब शरीर लचीला होता है तो मन भी शांत रहता है और यही संयम मैदान पर आत्मविश्वास में बदलता है।
Patna Cricket Academy इस बात को हर दिन दोहराती है कि मजबूत बनने से पहले लचीला बनो क्योंकि लचक ही ताकत की पहली पहचान है।