पटना क्रिकेट चयन की सच्चाई बीहारी खिलाड़ियों का असली संघर्ष

पटना क्रिकेट चयन की सच्चाई बीहारी खिलाड़ियों का असली संघर्ष

पटना में क्रिकेट खेलने वाले हजारों युवा हर दिन यह सपना लेकर मैदान में उतरते हैं कि वे एक दिन बड़े स्तर पर खेलेंगे। लेकिन आज के समय में क्रिकेट चयन सिर्फ प्रतिभा पर निर्भर नहीं रह गया है। कई खिलाड़ी खुले तौर पर यह कहते हैं कि चयन में सोशल पावर, पॉलिटिकल सपोर्ट और पैसों का प्रभाव बहुत ज्यादा हो गया है। ऐसे माहौल में एक साधारण परिवार से आने वाले खिलाड़ी को अपनी जगह बनाना और भी कठिन हो जाता है। यही वजह है कि आज बीहारी प्लेयर्स keyword पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पटना जिला बिहार का वह केंद्र है जहां सबसे ज्यादा क्रिकेट खेलने वाले युवा तैयार होते हैं। यहां के मैदानों में सुबह से शाम तक खिलाड़ी पसीना बहाते हैं लेकिन जब चयन की बारी आती है तो कई बार मेहनत को पहचान कम और बाहरी ताकतों को अहमियत ज्यादा दी जाती है। इस ब्लॉग में website शब्द भी शामिल किया जा रहा है ताकि यह डिजिटल स्तर पर भी अपनी बात रख सके।

पटना के हर क्षेत्र जैसे बोरिंग रोड, कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, पुनाईचक, दानापुर, फुलवारी, मसौढ़ी, बाइपास, पटना सिटी और ग्रामीण इलाकों में क्रिकेट से जुड़ी जबरदस्त प्रतिभा देखने को मिलती है। लेकिन खिलाड़ियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता अभी भी पूरी नहीं है और यही उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

पटना के खिलाड़ी अक्सर कहते हैं कि जब तक चयन पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होगा, तब तक मेहनत का पूरा फल मिलना मुश्किल है। कई प्रतिभाशाली बच्चों के पास सही किट नहीं होती, सही प्रशिक्षण नहीं मिलता लेकिन फिर भी वे संघर्ष करते रहते हैं। यही बीहारी खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत है।

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